मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने प्रम्बानन मंदिर पुनरुद्धार परियोजना का शुभारंभ किया
हावड़ा-दुर्गापुर रोड पर दिख रहा है बदलता बंगाल
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही उद्योग और निवेश की सियासत गरमा गई है। राज्य में उद्योगों के पतन और पलायन के आरोपों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उस नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि बंगाल से कंपनियां बाहर जा रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग उद्योग भागने की बात कर रहे हैं, वे सफेद झूठ बोल रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए विरोधियों को चुनौती दी कि वे हावड़ा से दुर्गापुर तक की सड़क के दोनों ओर नजर दौड़ाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) में जिस तेजी से नए संस्थान और विकास परियोजनाएं नजर आ रही हैं, वही बंगाल की तरक्की का असली प्रमाण है। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल बड़े-बड़े वादे करना नहीं, बल्कि जमीन पर स्थायी रोजगार और बुनियादी ढांचा (परिकाठामो) तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने कारोबारियों को भरोसा दिलाते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह राज्य में किसी भी तरह के बंद या हड़ताल की संस्कृति को बर्दाश्त नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि बंद से व्यापार और आम जनता का नुकसान होता है, इसलिए बंगाल में अब विकास की गति को कोई नहीं रोक सकता। उद्योगपतियों की समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने मुख्य सचिव से लेकर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक के दरवाजे खुले होने की बात कही। राजनीतिक रूप से इस बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिंगूर दौरे के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। जहां प्रधानमंत्री ने बंगाल में जंगलराज और औद्योगिक माहौल की कमी का आरोप लगाया था, वहीं ममता बनर्जी ने विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का कार्ड भी खेला है।
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि बंगाल में मंदिर हो या मस्जिद, सरकार ने सबके विकास के लिए काम किया है और यहां शांति के माहौल में ही व्यापार फल-फूल रहा है। सिंगूर की सभा और उसके बाद दिल्ली रवानगी से पहले ममता का यह रुख बता रहा है कि चुनाव में असली लड़ाई विकास के दावों और पलायन के आरोपों के बीच होने वाली है।